पाकिस्तान का टूटा गुरूर, घमंड हुआ चकनाचूर, अब भारत से लगाने लगा इस बात की गुहार

Indus Water Treaty

पाकिस्तान का टूटा गुरूर, घमंड हुआ चकनाचूर, अब भारत से लगाने लगा इस बात की गुहार

Amit Dev Sharma

Updated on:

Indus Water Treaty: भारत से पंगा लेना पाकिस्तान को अब भारी पड़ गया है और पड़ोसी मुल्क का गुरूर चकनाचूर हो गया है। इस वजह से ही पाकिस्तान अब भारत से सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को बहाल करने का आग्राह कर रहा है। बता दें कि पहलगाम हमले (Pahalgam attack) के बाद भारत ने पाकिस्तान पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था।

बता दें कि हाल ही के दिनों में भारत और पाकिस्तान के संबंध सबसे खराब दौर में पहुंचे हैं। पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का हालिया फैसला दिखाता है कि समझौता अब भी वैध और क्रियाशील है। बता दें कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत दो पनबिजली परियोजनाओं की डिजाइन के कुछ पहलूओं पर पाकिस्तान द्वारा आपत्ति उठाने जाने के बाद स्थायी मध्यस्थता न्यायालय में कार्यवाही चली जिसे भारत ने कभी मान्यता नहीं दी। भारत ने शुक्रवार को इस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने एक जारी बयान में कहा कि, 27 जून को मध्यस्थता न्यायालय द्वारा सुनाए गए पूरक निर्णय पाकिस्तान की इस स्थिति को पुष्टि करता है कि सिंधु जल संधि वैध और क्रियाशील है तथा भारत को इसके बारे में एकतरफा कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही बयान में कहा गया, हम भारत से आग्रह करते हैं कि वह सिंधु जल संधि के सामान्य कामकाज को तुरंत बहाल करे तथा संधि के अपने दायित्वों को पूरी तरह और ईमानदारी से पूरा करे। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने भी सोशल मीडिया पर एक बयान दिया।

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान ने किशनगंगा-रातले मामले में अपने अधिकार क्षेत्र की पुष्टि करने वाले मध्यस्थता न्यायालय के पूरक निर्णय का स्वागत किया है। यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह से वैध है। भारत इसे एकतरफा रूप से ‘स्थगित’ नहीं रख सकता। राज्यों को अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन से मापा जाता है। सिंधु जल संधि को कागजों और भावना दोनों में बरकरार रखा जाना चाहिए’

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